Science News (Hindi) November 2018

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November 2018


# Black Hole : अब Virtual reality के रूप में

# ओज़ोन परत(Ozone layer) के बारे में अच्छी खबर

# पार्कर सोलर प्रोब(Parker Solar Probe) सूरज के बहुत ही निकट पहुंचा।

# ISRO और NASA  ने एक विशालकाय Black Hole का पता लगाया।

अब समाचार विस्तार से

# Black Hole : अब Virtual reality के रूप में

ब्लैक होल (Black Hole) के प्रकृति को समझने के लिए वैज्ञानिकों ने ब्लैक होल सैजिटेरियस A (Sagittarius A)के प्रतिरूप का वर्चुअल रियलिटी (Virtual reality) तैयार किया है। सैजिटेरियस A हमारी आकाशगंगा (Milky way) के केंद्र में मौजूद एक ब्लैक होल है। सैजिटेरियस A   के बारे में अब तक जो जानकारी प्राप्त है उसके माध्यम से ही वर्चुअल रियलिटी का निर्माण किया जाएगा। 360 डिग्री वर्चुअल रियलिटी प्रतिरूप बनाने के लिए उन तस्वीरों का उपयोग किया जाएगा जो लेटेस्ट एस्ट्रोफिजिक्स मॉडल पर आधारित है।  इस प्रकार के वर्चुअल रियलिटी माध्यम से न केवल ब्लैक होल को समझने में आसानी होगी बल्कि बच्चों में स्पेस साइंस (Space Science) के प्रति रुचि भी पैदा होगी। नीदरलैंड के रैडबौड यूनिवर्सिटी में शोध के कॉरस्पॉडिंग लेखक जोर्डी डावेलार (Jordy Davelaar) ने कहा कि 'हमारी वर्चुअल रियलिटी ने ब्लैक होल के वातावरण की सबसे वास्तविक तस्वीर दी है। इससे हमें ब्लैक होल के व्यवहार को समझने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि हमारे जीवन में एक ब्लैक होल की यात्रा करना असंभव है ऐसे में इस तरह की स्थिति हमें इसके बारे में समझने में सहायता कर सकती है।

 हम आपको बता दें कि ब्लैक होल एक ऐसा स्थान होता है जहां गुरुत्वाकर्षण शक्ति बहुत ही स्ट्रॉन्ग होती है। जहां से प्रकाश भी बाहर नहीं निकल सकता इसलिए इसे देखना संभव नहीं है।

ओज़ोन परत(Ozone layer) के बारे में अच्छी खबर

[Positive News]

संयुक्त राष्ट्र (United Nation) की एक नई रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें बताया गया है कि धरती की सुरक्षा कवच ओज़ोन परत(Ozone layer) को अब तक जो नुकसान हुए थे उसका अब धीरे-धीरे भरपाई हो रही है। यह एक वाकई अच्छी और सकारात्मक खबर है। 

रिपोर्ट के अनुसार उत्तरी गोलार्ध पर ओजोन की ऊपरी परत 2030 तक पूरी तरह से ठीक हो जाएगी। ओज़ोन परत की ठीक होने की प्रक्रिया दक्षिणी गोलार्ध पर धीमी है, लेकिन यह भी शायद 2060 तक पूरी तरह से ठीक हो जाएगी।

ओजन परत को सबसे अधिक नुकसान 1970 के बाद हुई थी क्योंकि इस समय पूरी दुनिया विकास के दौर से गुजर रही थी। इस वक्त पूरी दुनिया में अंधाधुंध विकास तो हो रही थी लेकिन पर्यावरण की चिंता नहीं की जा रही थी। जब वैज्ञानिकों को इसके बारे में पता चला तो पूरी दुनिया में खतरनाक रसायनों का इस्तेमाल धीरे धीरे बंद हुआ। बहुत से अंतर्राष्ट्रीय पहल हुए और अभी भी जारी है।

 यह प्रयास अगर ऐसे ही जारी रहा तो शायद 2030 तक ओज़ोन परत पूरी तरह से ठीक हो जाएगा। ओजन परत धरती पर रहने वाले सभी जीवो को सूर्य के खतरनाक पराबैंगनी किरणों (Ultraviolet rays) से बचाती है।

# पार्कर सोलर प्रोब(Parker Solar Probe) सूरज के बहुत ही निकट पहुंचा।

पार्कर सोलर प्रोब(Parker Solar Probe) सूरज के बहुत ही निकट पहुंच चुका है। इसकी सूर्य की सतह से दूरी 24 million km है और यह इतना नजदीक होते हुए भी सही ढंग से अपना कार्य करते हुए सक्रिय हैं। इसने 29 अक्टूबर 2018 को 1976 में भेजे गए स्पेसक्राफ्ट Helios B के रिकॉर्ड को तोड़ते हुए नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह पहला मानव निर्मित कोई वस्तु है जो सूर्य के इतना नजदीक पहुंचा है। यह बड़ी ही कुशलता के साथ सूर्य के वातावरण में ताप(Temperature) और विकिरण(Radiation) का सामना करते हुए इसकेे रहस्यों को उजागर कर रहा है। पार्कर सोलर प्रोब को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह खुद को सूर्य के अधिकतम तापमान और ख़तरनाक विकिरण से रक्षा कर पाए।
आसान भाषा में समझना हो तो  यह प्रोब लगभग 3 दशकों से वैज्ञानिकों के अथक परिश्रम का फल है, जिसमें मानव सभ्यता को सूर्य के इतना नजदीक पहुंचा दिया।
5 नवंबर 2018 को जब यान सूर्य के सतह से 24 million km की दूरी पर था तो वैज्ञानिकों को इस यान के बारे में सूचना मिली कि यह सही ढंग से कार्य कर रहा है और वैज्ञानिक डाटा को इकट्ठा कर रहा है।
5 नवंबर 2018 को सूर्य के नजदीक जाने के दौरान इसकी गति लगभग 95 km/s थी। इतनी अत्यधिक गति अन्य स्पेसक्राफ्ट की गति  की तुलना में एक नया रिकॉर्ड है। आज तक किसी भी स्पेसक्राफ्ट की गति इतनी अधिक नहीं मापी गई है। इस दौरान इसने लगभग 1371 डिग्री सेल्सियस तापमान का भी सहन किया।
 2025 में जब यह यान सूर्य के सबसे निकट पहुंचेगा तब इसकी सूर्य की सतह से दूरीे 6.16 मिलियन किलोमीटर होगी, जो मानव इतिहास में एक नया रिकॉर्ड होगा।

# ISRO और NASA  ने एक विशालकाय Black Hole का पता लगाया।
ISRO ने अंतरिक्ष में एक विशालकाय Black Hole को ढूंढ निकाला है। यह खोज ISRO के AstroSat ऑब्जर्वेटरी के द्वारा किया गया है। AstroSat भारत का पहला एस्ट्रोनॉमी सैटेलाइट है। इस आब्जर्वेटरी द्वारा एक 4U 1630-47 नामक बाइनरी स्टार सिस्टम में एक विशालकाय Black Hole के बारे में पता चला और यह Black Hole बहुत तेजी से घूम रहा था। यह इतनी तेजी से घूम रहा था कि आमतौर पर Black Holes इतनी तेजी से नहीं घूमते। इस कारण से यह खोज बहुत ही महत्वपूर्ण है। बाद में NASA के Chandra X-ray Observatory  ने इसके spin rate का गणना किया। इसका rate 0.9 था। Black Hole में इतना घनत्व होता है कि इसके गुरुत्वाकर्षण प्रभाव के कारण प्रकाश भी इसमें जाने के बाद बाहर नहीं आ पाता है। इस कारण से यह दिखाई नहीं देता। इसका पता इसके गुरुत्वाकर्षण बल के प्रभाव और स्पिन रेट के आधार पर ही की जाती है।


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